जयपुर | जलग्रहण विकास एवं भू संरक्षण विभाग की विभिन्न योजनाओं की प्रगति को लेकर सोमवार को सचिवालय में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0, ऑडिट पेरा और विभाग की अन्य प्रमुख योजनाओं की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान (MJSA) मोबाइल ऐप पर कर्मयोगी वाटरशेड मॉड्यूल लॉन्च किया गया। यह मॉड्यूल विभागीय कार्मिकों के प्रशिक्षण और क्षमता विकास के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
प्रशिक्षण आधारित डिजिटल पहल
लॉन्च किए गए कर्मयोगी वाटरशेड मॉड्यूल में विशेषज्ञों द्वारा तैयार प्रशिक्षण वीडियो शामिल किए गए हैं, जो जल संरक्षण और भू संरक्षण से जुड़े कार्यों को सरल और व्यावहारिक तरीके से समझाने में सहायक होंगे। इसे विभागीय कार्मिकों के लिए एक उपयोगी ई-लर्निंग टूल बताया गया, जिससे कार्य निष्पादन की गुणवत्ता और दक्षता में सुधार आएगा।
इस अवसर पर मॉड्यूल के निर्माण में योगदान देने वाले 14 सहयोगियों को प्रमाण पत्र भी प्रदान किए गए।
क्या है कर्मयोगी वाटरशेड मॉड्यूल
कर्मयोगी वाटरशेड मॉड्यूल में विभाग द्वारा संचालित योजनाओं के अंतर्गत आने वाली प्रमुख गतिविधियों पर वीडियो आधारित प्रशिक्षण सामग्री तैयार की गई है। इसमें अभियांत्रिकी ढांचे, डीपीआर, MIS, गुणवत्ता नियंत्रण, टेंडर प्रक्रिया, RTPP नियम सहित अन्य तकनीकी विषय शामिल हैं।
यह सामग्री ई-लर्निंग का हिस्सा है और MJSA ऐप, विभाग के यूट्यूब चैनल तथा अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सर्वसुलभ रहेगी।
एक ही प्लेटफॉर्म पर समृद्ध प्रशिक्षण सामग्री
विभाग द्वारा अब तक 38 वीडियो तैयार कर पोर्टल पर अपलोड किए जा चुके हैं। इसके साथ ही भारत सरकार की PMKSY वेबसाइट के 13 वीडियो, आईआईटी रुड़की और खड़गपुर सहित अन्य संस्थानों के 77 वीडियो तथा विभाग द्वारा संपादित सफल परियोजनाओं की कहानियां भी इस प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहेंगी।
यह पहल विभागीय अभियंताओं की क्षमता, तकनीकी दक्षता और व्यावहारिक ज्ञान को बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी। साथ ही जल एवं भू संरक्षण में रुचि रखने वाले लाभार्थियों के लिए यह जागरूकता और ज्ञानवर्धन का प्रभावी माध्यम बनेगा। विभिन्न प्रशिक्षण संस्थान भी इस सामग्री का सीधे प्रशिक्षण उद्देश्यों के लिए उपयोग कर सकेंगे।
विशेषज्ञ अनुभव का समावेश
उल्लेखनीय है कि मिशन ज्ञान और IPCA फाउंडेशन के साथ एक वर्ष के लिए नॉन-फाइनेंशियल करार किया गया था। इसके तहत सेवानिवृत्त अभियंताओं के अनुभव और विभागीय अभियंताओं के तकनीकी सहयोग से यह प्रशिक्षण सामग्री तैयार की गई है।
बैठक में पंचायती राज विभाग के शासन सचिव एवं आयुक्त, जलग्रहण विकास एवं भू संरक्षण विभाग के निदेशक सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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