राजस्थान में कृषि अवसंरचना को मिलेगा नया विस्तार, मंडियों और फूड पार्कों के लिए सरकार देगी भूमि लागत का पूरा सहयोग

 अजमेर। राजस्थान सरकार ने कृषि क्षेत्र और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए नई कृषि मंडियों, गौण मंडियों तथा फूड पार्कों की स्थापना को आसान बना दिया है। बजट वर्ष 2026-27 की घोषणा के तहत अब शहरी स्थानीय निकाय क्षेत्रों में इन परियोजनाओं के लिए भूमि आवंटन डीएलसी दर की मात्र 25 प्रतिशत राशि पर किया जाएगा।

राज्य सरकार का यह निर्णय इन परियोजनाओं के लिए बड़ी राहत साबित होगा, क्योंकि भूमि आवंटन के लिए निर्धारित 25 प्रतिशत राशि का भुगतान भी संबंधित संस्था को नहीं करना पड़ेगा। यह राशि राज्य सरकार द्वारा नगर निगम, नगर परिषद, नगरपालिका, विकास प्राधिकरण अथवा नगर विकास न्यास को उपलब्ध कराई जाएगी।

सरकार के इस कदम से नई कृषि मंडियों और फूड पार्कों की स्थापना का मार्ग आसान होगा तथा कृषि आधारित निवेश को बढ़ावा मिलेगा। नगरीय विकास, आवासन एवं स्वायत्त शासन विभाग द्वारा जारी आदेशों में कहा गया है कि यह व्यवस्था वित्त विभाग की सहमति के बाद लागू की गई है।

किसानों और उद्यमियों दोनों को होगा फायदा

विशेषज्ञों के अनुसार नई व्यवस्था से कृषि उत्पादों के विपणन और भंडारण की सुविधाओं में सुधार होगा। फूड पार्कों के विकास से कृषि उपज के प्रसंस्करण को बढ़ावा मिलेगा, जिससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त हो सकेगा।

साथ ही, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में निवेश बढ़ने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। गौण मंडियों के विस्तार से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में कृषि व्यापार को नई गति मिलने की संभावना है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती

राज्य सरकार का मानना है कि कृषि अवसंरचना के विकास से किसानों, व्यापारियों और खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को एक बेहतर प्लेटफॉर्म मिलेगा। इससे कृषि उत्पादों की वैल्यू एडिशन बढ़ेगी, आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।

सरकार के इस निर्णय को कृषि क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने और राजस्थान को कृषि प्रसंस्करण के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

Post a Comment

0 Comments