जयपुर। झालावाड़ स्कूल हादसे में 7 बच्चों की मौत के बाद भी राजस्थान में सरकारी स्कूलों की इमारतों की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। शिक्षा विभाग के नए सर्वे ने साफ कर दिया है कि हालात अब भी गंभीर हैं।
राज्य के 65 हजार सरकारी स्कूलों में से 3,768 स्कूलों की पूरी इमारतें जर्जर घोषित हुई हैं। वहीं 83,783 कक्षाएं और 16,765 शौचालय अत्यंत खराब स्थिति में पाई गई हैं।
इसके अलावा 2,19,902 कक्षाओं और 29,753 शौचालयों को तत्काल मरम्मत की जरूरत बताई गई है।
हाई कोर्ट की फटकार के बाद भी सुधार नहीं
झालावाड़ के पिपलोदी हादसे के बाद हाई कोर्ट ने सरकार को एक्शन प्लान बनाने और स्कूल भवनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आदेश दिया था।
6 नवंबर को कोर्ट ने फिर सख्त निर्देश देते हुए कहा था कि यदि इस बार विस्तृत एक्शन प्लान समय पर नहीं दिया गया तो शिक्षा विभाग के सचिव को तलब किया जाएगा।
इसके बावजूद स्कूलों की स्थिति में कोई ठोस सुधार नहीं दिखा।
शिक्षा मंत्री का कदम: विधायक कोष से 20% राशि देने का अनुरोध
इसी बीच शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने सभी विधायकों को पत्र लिखकर अपने विधायक कोष की 20% राशि (करीब 1 करोड़ रुपये) स्कूल भवनों की मरम्मत और नए निर्माण के लिए उपलब्ध कराने का आग्रह किया है।
दिलावर ने पत्र में लिखा है कि भारी मानसून व जर्जर ढांचे को देखते हुए नए कक्षों और भवनों की तत्काल आवश्यकता है। इसके लिए बड़ी राशि की जरूरत है।
पहले जारी बजट को हाई कोर्ट ने बताया था ‘अपर्याप्त’
राज्य सरकार ने स्कूल मरम्मत के लिए 1,624.29 करोड़ रुपये का बजट तय किया था,
लेकिन हाई कोर्ट ने इसे अधूरा और जरूरत के मुताबिक अपर्याप्त बताया था।

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