संपन्न लोगों को अब नहीं मिलेगा गरीबों के हक का गेहूं: सब्सिडी नहीं छोड़ने वाले अपात्रों से होगी वसूली



 जयपुर: राज्य सरकार ने खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और न्यायसंगत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। विभाग की ओर से चलाए जा रहे ‘गिव-अप अभियान’ के तहत अब उन लोगों पर कार्रवाई शुरू की जाएगी, जिन्होंने संपन्न होने के बावजूद सब्सिडी वाला गेहूं वापस नहीं किया। ऐसे अपात्र लाभार्थियों से 31 दिसंबर तक वसूली की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

इस पहल के पीछे मूल उद्देश्य यह है कि गरीबी रेखा के नीचे जीवन गुज़ारने वाले असली हकदार परिवारों तक ही खाद्य सुरक्षा का लाभ पहुंचे।


48 लाख लोगों ने खुद छोड़ा हक, 70 लाख को मिली नई सुरक्षा

अभियान अब तक काफी असरदार रहा है। बीते एक साल में 48 लाख संपन्न लाभार्थियों ने स्वेच्छा से अपना नाम एनएफएसए सूची से हटवाया, जिससे खाद्य सुरक्षा प्रणाली में जगह बनी। इस खाली स्थान पर अब तक 70 लाख 25 हजार पात्र और वंचित परिवारों को शामिल किया जा चुका है।

यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कई ग्रामीण एवं शहरी गरीब वर्षों से खाद्य सुरक्षा सूची में शामिल होने का इंतज़ार कर रहे थे।


किसकी होगी जांच? कौन माना जाएगा अपात्र

खाद्य मंत्री सुमित गोदारा के अनुसार विभाग ने अपात्रता को लेकर स्पष्ट नियम तय किए हैं। इनमें शामिल हैं:

  • 50,000 रुपये से अधिक सालाना बिजली बिल जमा कराने वाले परिवार

  • घर में एसी का उपयोग करने वाले

  • MSP दर पर 100 क्विंटल से अधिक फसल सरकार को बेचने वाले

  • परिवार का कोई सदस्य यदि –

    • सरकारी/अर्द्धसरकारी/स्वायत्त संस्थान में नियमित कर्मचारी हो

    • 1 लाख रुपये से अधिक वार्षिक पेंशन प्राप्त करता हो

    • आयकरदाता हो

    • परिवार के पास चौपहिया वाहन हो (ट्रैक्टर व एक व्यावसायिक वाहन को छोड़कर)

इन वर्गों को खाद्य सुरक्षा के दायरे से बाहर माना गया है। विभाग अब इनकी विस्तृत जांच कर रहा है और सब्सिडी का अनुचित लाभ लेने पर वसूली अनिवार्य होगी।


गिव-अप अभियान: एक वर्ष का सामाजिक बदलाव

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और खाद्य मंत्री के निर्देशन में 1 नवंबर 2024 से शुरू हुआ यह अभियान सामाजिक जिम्मेदारी की भावना पर आधारित है। बड़ी संख्या में लोगों ने इसे सकारात्मक रूप से स्वीकार किया है। अधिकारियों के अनुसार, यह अभियान न केवल प्रणाली को पारदर्शी बना रहा है बल्कि यह भी सुनिश्चित कर रहा है कि अनाज उन परिवारों तक पहुंचे जिन्हें इसकी सबसे अधिक जरूरत है।

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