जयपुर। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों ने भारतीय जनता पार्टी के राजनीतिक ग्राफ को और ऊंचा कर दिया है। चुनाव परिणाम के बाद बीजेपी के पास अब देशभर की विधानसभाओं में कुल 1,654 विधायक हो गए हैं — जो किसी भी दल के लिए सबसे बड़ी संख्या है। पार्टी के प्रदर्शन में यह इजाफा बिहार में शानदार जीत के बाद देखने को मिला है।
बीजेपी के अब तक सबसे ज़्यादा विधायक उत्तर प्रदेश से हैं, जहां पार्टी के 255 सदस्य विधानसभा में मौजूद हैं। बिहार में भी इस बार बीजेपी ने 89 सीटें जीतकर राज्य की सबसे बड़ी पार्टी के रूप में अपनी स्थिति मजबूत की है। इससे एनडीए गठबंधन को भी बड़ी बढ़त हासिल हुई है।
मोदी युग में लगातार विस्तार
बीजेपी का संगठनात्मक और चुनावी ग्राफ पिछले एक दशक में लगातार ऊपर गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पार्टी ने राज्य-दर-राज्य अपनी पकड़ मजबूत की। हाल ही में हुए उपचुनावों में भी बीजेपी ने जम्मू-कश्मीर की नगरोटा और ओडिशा की नुआपाड़ा सीट जीतकर यह दिखा दिया है कि उसका फोकस सिर्फ केंद्र की सत्ता तक सीमित नहीं है।
अकेले बीजेपी की सरकार वाले राज्य
वर्तमान में निम्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बीजेपी की पूर्ण बहुमत वाली सरकारें हैं:
उत्तर प्रदेश
मध्य प्रदेश
गुजरात
राजस्थान
उत्तराखंड
हरियाणा
असम
त्रिपुरा
गोवा
ओडिशा
अरुणाचल प्रदेश
छत्तीसगढ़
दिल्ली (केंद्र शासित प्रदेश)
एनडीए गठबंधन की सरकारें
बीजेपी नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन की सरकारें इन राज्यों में हैं:
बिहार (जनता दल–यूनाइटेड के साथ)
महाराष्ट्र (शिवसेना और अन्य सहयोगियों के साथ)
आंध्र प्रदेश (तेलुगु देशम पार्टी के साथ)
सिक्किम (सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा के साथ)
नागालैंड (नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी के साथ)
मेघालय (नेशनल पीपुल्स पार्टी के साथ)
मणिपुर
पुडुचेरी (केंद्र शासित प्रदेश)
बीजेपी की यात्रा और मजबूती
6 अप्रैल 1980 को गठित हुई भारतीय जनता पार्टी ने एक छोटे से राजनीतिक संगठन के रूप में शुरुआत की थी। शुरुआती वर्षों में पार्टी के पास विधानसभाओं में सीमित प्रतिनिधित्व था, लेकिन धीरे-धीरे यह “दुनिया का सबसे बड़ा राजनीतिक दल” बनकर उभरा।
2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने 282 सीटें जीतकर इतिहास रचा। एनडीए को कुल 336 सीटें मिलीं और नरेंद्र मोदी 26 मई 2014 को भारत के 14वें प्रधानमंत्री बने। उस समय बीजेपी का वोट शेयर 31% था, जो आधुनिक भारतीय राजनीति के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ।
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