वर्तमान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हर वर्ग की जरूरत बन गया है। बुजुर्ग हो या युवा, व्यापार हो या नौकरी . आज हर कोई इससे जुड़ा हुआ है। लेकिन क्या किसी ने यह सोचा है कि आपने जो जानकारी AI को दी है, उसका उपयोग आखिर किस तरह किया जा रहा होगा?
कई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी कंपनियां आपकी आंखों और हाथों की स्कैनिंग कर रही हैं और आपको इसका एहसास तक नहीं होता। कई कंपनियां इसे “ट्रेंड” के नाम पर आपसे मांगती हैं और लोग अपनी मर्जी से यह जानकारी दे भी रहे हैं। ऐसा नहीं है कि किसी का इस पर ध्यान नहीं गया, लेकिन ट्रेंड को फॉलो करने के जुनून ने इन गंभीर बातों को दबा दिया है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा चलाए जा रहे कई ट्रेंड्स को कंटेंट क्रिएटर्स भी तेजी से प्रमोट कर रहे हैं, जैसे :
AI आपकी कुंडली पढ़ सकता है
(क्या गया — आपकी जन्मतिथि और जन्म का समय)
AI आपके हाथों की लकीरें पढ़ सकता है
(क्या गया — आपके फिंगरप्रिंट्स)
(क्या गया — आपकी आंखों और चेहरे की पहचान)
ये कुछ ऐसे ट्रेंड्स हैं जो आज तेजी से चलन में हैं और लोग बढ़-चढ़कर इनमें हिस्सा ले रहे हैं, बिना यह समझे कि यही वो संवेदनशील जानकारियां हैं जो आपके आधार कार्ड और अन्य सरकारी दस्तावेजों की सुरक्षा से जुड़ी होती हैं।
आपकी जन्मतिथि और जन्म का समय आपके फोन, बैंकिंग या किसी महत्वपूर्ण ID का पासवर्ड भी हो सकता है।
आधार और अन्य जरूरी दस्तावेजों की सुरक्षा आपकी आंखों और हाथों की लकीरों जैसी बायोमेट्रिक पहचान से होती है।
जरा सोचे :
लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के नाम पर ये सारी जानकारियां लोग अपनी मर्जी से कंपनियों को दे रहे हैं। बाद में अगर कोई कंपनी पर सवाल उठाए या केस करने की बात करे, तो कंपनियों का तर्क यही होगा कि यह सारी जानकारी आपने स्वयं अपनी इच्छा से साझा की थी।
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