भैरवई गांव में ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

 किसानों की समस्याओं का समाधान कर वितरित किए मूंग एवं ढेंचा के बीज



अजमेर। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केंद्र, तबीजी, अजमेर द्वारा ‘खेत बचाओ अभियान’ के अंतर्गत अजमेर जिले के भैरवई गांव में मृदा स्वास्थ्य परीक्षण, मृदा प्रबंधन एवं संतुलित उर्वरक उपयोग, सतत कृषि विकास तथा प्राकृतिक खेती विषयक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को रासायनिक उर्वरकों एवं रसायनों के अत्यधिक उपयोग से होने वाले दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना तथा संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, जैविक खाद के उपयोग एवं कम लागत वाली वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देना था। कार्यक्रम में 27 पुरुष एवं 25 महिला किसानों ने भाग लिया।

कार्यक्रम के दौरान डॉ. करतार सिंह, वैज्ञानिक (पादप रोग), ने किसानों को जैव उर्वरकों के महत्व की जानकारी देते हुए फसल चक्र एवं हरी खाद अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि इन उपायों से मृदा में आवश्यक खनिज तत्वों की उपलब्धता बढ़ती है तथा मिट्टी की भौतिक, जैविक एवं रासायनिक गुणवत्ता में सुधार होता है। उन्होंने किसानों को नियमित रूप से मृदा परीक्षण करवाने और उसी के आधार पर संतुलित उर्वरकों का उपयोग करने की सलाह दी।

डॉ. सिंह ने वर्षा जल संरक्षण एवं उसके वैज्ञानिक प्रबंधन की आवश्यकता बताते हुए कहा कि संग्रहित जल का उपयोग खेती, पशुपालन एवं पेयजल आवश्यकताओं के लिए प्रभावी रूप से किया जा सकता है। कार्यक्रम के दौरान किसानों द्वारा लाए गए जल नमूनों की जांच भी की गई तथा जल गुणवत्ता सुधार के उपायों की जानकारी प्रदान की गई।

वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी जी.के. त्रिपाठी ने प्राकृतिक खेती की विभिन्न तकनीकों पर प्रकाश डालते हुए किसानों को बीजामृत एवं जीवामृत तैयार करने की विधि समझाई। उन्होंने ढेंचा की फसल को हरी खाद के रूप में उपयोग करने की सिफारिश की तथा घरेलू जैविक अपशिष्ट एवं कृषि अवशेषों से कम्पोस्ट एवं वर्मी कम्पोस्ट तैयार कर मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने पर जोर दिया।

कृषि पर्यवेक्षक रमेश ने राजस्थान सरकार द्वारा किसानों के हित में संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए उनके लाभ एवं उपयोगिता से अवगत कराया।

कार्यक्रम के समापन पर किसानों को मूंग एवं ढेंचा के बीज वितरित किए गए। इसके पश्चात वैज्ञानिकों एवं कृषि विशेषज्ञों ने किसानों के खेतों का भ्रमण कर खेती से संबंधित समस्याओं का समाधान भी किया।

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